बुंदेलखंड क्षेत्र के जिले

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बुंदेलखंड

बुंदेलखंड एक भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों के बीच विभाजित है। झांसी बुंदेलखंड का सबसे बड़ा शहर और सागर दूसरा सबसे बड़ा शहर है। 59000 वर्ग किलोमीटर में फैला बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश के  7 जिलों चित्रकूट, बांदा, झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा और ललितपुर तथा मध्य प्रदेश के 6 जिलों छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, सागर, दतिया और पन्ना में फैला हुआ है। 

उत्तर प्रदेश के जिले 

चित्रकूट

बुंदेलखंड क्षेत्र का धार्मिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का स्थान उत्तर प्रदेश में चित्रकूट प्रदेश की सीमा पर स्थित है। जिसका मुख्यालय चित्रकूट धाम है। यह मुख्यतः उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच स्थित है। यह हिंदू धर्म के कई मंदिरों और तीर्थों के लिए जाना जाता है। अमावस्या, सोमवती अमावस्या, दीपावली, शरद पूर्णिमा, मकर संक्रांति, रामनवमी आदि अवसरों पर यह पूरे वर्ष तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है। 

भूगोल 

चित्रकूट का शाब्दिक अर्थ है कई औषधियों की पहाड़ी। यह जिला उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उत्तरी विंध्य रेंज में पड़ता है। यह उत्तर प्रदेश के चित्रकूट तथा मध्य प्रदेश के सतना जिले में शामिल है। उत्तर प्रदेश में इस जिले का गठन 1998 ईस्वी को किया गया था।  चित्रकूट पर्वत माला में मुख्यतः कामदगिरि, हनुमान धारा, जानकीकुंड, लक्ष्मण पहाड़ी और देवांगना प्रसिद्ध धार्मिक पर्वत है। यहां से इलाहाबाद में बमरौली हवाई अड्डे की दूरी 106 किलोमीटर है। पौराणिक काल में यहां पर भगवान राम देवी सीता और उनके भाई लक्ष्मण ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान 11 वर्ष चित्रकूट में बताए थे। जिससे यहां पर बहुत से धार्मिक स्थान हैं। कहा जाता है कि यहां सभी देवी देवताओं का स्थाई निवास है। 

प्रमुख पर्यटन स्थल 

चित्रकूट में घूमने के लिए प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल रामघाट, कामदगिरि, भरत मिलाप, जानकीकुंड, सती अनसूया आश्रम, गुप्त गोदावरी, पंपापुर, हनुमान धारा, भरतकूप, राम सैया, राजापुर, गणेश बाग, सीतापुर, कामतानाथ, धारकुंडी आदि हैं। 

बांदा

बांदा उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। यह उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में विभाजित है। यह यमुना नदी के दक्षिण में स्थित है। बांदा के दाहिने किनारे से केन नदी गुजरती है। यह इलाहाबाद से 189 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित है। बांदा ब्रिटिश काल में इलाहाबाद डिवीजन का एक भाग था। यहां का प्रमुख मराठा शासक शमशेर बहादुर प्रथम था। जो बाजीराव प्रथम और मस्तानी के पुत्र थे। उन्होंने पानीपत की तीसरी लड़ाई में अपना योगदान दिया था। जिसमें वह घायल होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। उनके बाद उनके उत्तराधिकारी अली बहादुर ने बांदा का शासन संभाला। उनके बाद उनके पुत्र शमशेर बहादुर द्वितीय ने 1803 के एंगलो मराठा युद्ध में अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। बांदा की मुख्य बोलियां हिंदी और उर्दू हैं। यहां क्षेत्रीय रूप से बुंदेली भाषा बोली जाती है। 

 भूगोल 

बांदा जिले को देश का सबसे गर्म स्थान भी कहा जाता है। यहां का औसत तापमान गर्मियों में 48 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है। इस जिले का सर्दियों में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेंटीग्रेड से 20 डिग्री सेंटीग्रेड के मध्य रहता है। इस जिले में वार्षिक वर्षा 15 मिलीमीटर से 800 मिलीमीटर के मध्य होती है और यहां की औसत आद्रता लगभग 50 से  70 प्रतिशत रहती है। 

प्रमुख पर्यटन स्थल

बांदा जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल बाम देवेश्वर मंदिर और पहाड़ी, केन नदी, भूरागढ़ किला, गुढ़ा के हनुमान जी, जैन मंदिर, जामा मस्जिद, कालिंजर का किला, एंगलेश्वरी देवी, महेश्वरी देवी मंदिर, नवाब टैंक, संकट मोचन मंदिर, सेंट जॉर्ज चर्च आते हैं। 

झांसी 

झांसी उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है। यह दक्षिण में पहूज नदी के तट पर स्थित है। इसे बुंदेलखंड का गेट वे भी कहा जाता है। यह नई दिल्ली से 420 किलोमीटर, ग्वालियर से 102 किलोमीटर दक्षिण में है। झांसी प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से सड़क और रेलवे नेटवर्क द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इसे भारत सरकार द्वारा रक्षा गलियारे के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। श्रीनगर से कन्याकुमारी जाने वाला उत्तर दक्षिण गलियारा झांसी के निकट से होकर गुजरता है। जिससे यहां बुनियादी ढांचे और अचल संपत्ति के विकास में तेजी आई है। झांसी स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश का सबसे स्वच्छ तीसरा शहर था। यहां एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की विकास की योजना बनाई जा रही है। यह भारत के स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी चुना गया है। प्राचीन काल में झांसी चंदेल राजपूत राजाओं का राज्य था। इसे बलवंत नगर के नाम से भी जाना जाता था। 17 वीं शताब्दी में प्रमुख रूप से ओरछा के राजा राजवीर सिंह देव ने 1613 ईसवी में झांसी के किले का निर्माण करवाया। 1729 में यह मराठा राज्य के अधीन आया। 18 वीं शताब्दी में झांसी मराठा प्रांत की एक राजधानी के रूप में तथा 1857 के बाद ब्रिटिश रियासत का हिस्सा बन गया। स्वतंत्रता के बाद झांसी को उत्तर प्रदेश राज्य में शामिल किया गया। 

 भूगोल 

झांसी की समुद्र तल से औसत ऊंचाई 284 मीटर है। झांसी एक पठारी क्षेत्र है जो चट्टानी मृदा खनिजों के लिए जाना जाता है। शहर के उत्तर में एक प्राकृतिक ढलान है। जो उत्तर प्रदेश के विशाल मैदान की दक्षिण पश्चिम सीमा पर स्थित होने के कारण है। झांसी की भूमि खट्टे फलों के लिए अधिक उपयुक्त है। यहां पर गेहूं, दाल, मटर और तिलहन की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। यहां पर कृषि मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर ही निर्भर है। यह पीतल के बर्तनों के निर्माण का प्रमुख केंद्र भी है। यहां पर खनन में चूना और ग्रेनाइट पत्थर को निकाला जाता है। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल 

झांसी के प्रमुख पर्यटन स्थल झांसी का किला, झांसी म्यूजियम, सेंट जूड्स श्राइन चर्च, रानी लक्ष्मी बाई पार्क, परीक्षा बांध, बरुआसागर, झांसी हर्बल गार्डन, रानी महल, बरुआसागर किला, गणेश मंदिर, महाराजा गंगाधर राव की छतरी आदि है। 

जालौन

जालौन जिला मुख्य रूप से मराठा साम्राज्य का हिस्सा था। जिसे 1803 में अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया और यह 1806 तक ब्रिटिश रक्षक बना रहा। यहां पर रहने वाले महाराष्ट्रीयन पंडितों को दखिनी पंडित के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उनके पूर्वज मराठा पेशवा की सेवा में रहे थे। यहां के अंतिम शासक गोविंदराव द्वितीय की मृत्यु 1840 ईसवी में हो गई थी। जिसके बाद अंग्रेजों ने इस पर पूर्ण रूप से अधिकार कर लिया। 1860 में जालौन राज्य के पूर्व निवासी शासकों के निवास गढ़वाली चौकी जो कालपी में थी, उसको ध्वस्त कर दिया गया और उसकी जगह बैथगंज ने ले ली। आजादी के बाद इस जिले की राजधानी के लिए अधिकारियों ने उरई को प्राथमिकता दी क्योंकि जालौन एक पिछड़ी हुई जगह थी। 

भूगोल

यह जिला झांसी संभाग का हिस्सा है। जिसका क्षेत्रफल 4565 वर्ग किलोमीटर है। यह जिला पहाड़ी प्रदेश के उत्तर में मैदानी भाग में स्थित है। यह लगभग यमुना नदी से घिरा हुआ है। जो इसकी उत्तरी सीमा बनाती है। इसकी सहायक नदी बेतवा इसकी दक्षिणी सीमा और पहुज पश्चिमी सीमा बनाती है। इस जिले में वृक्ष आवरण बहुत कम है तथा कृषि के लिए मध्यम उपजाऊ भूमि है। गैर नदी जिले के मध्य से कई छोटे छोटे नालों से बहती है। यह जिला भी बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों की भांति अक्सर सूखाग्रस्त रहता है। 

प्रमुख पर्यटन स्थल

जिले में बहुत सारे ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं। जिनमें से रामपुरा किला, जगम्मनपुर किला, लंका मीनार, चौरासी गुंबद, शारदा मंदिर, कोच की रामलीला, शालाघाट, जागेश्वर मंदिर, पचनदा धाम, वेदव्यास मंदिर, सूर्य मंदिर प्रमुख हैं। 

हमीरपुर

हमीरपुर जिला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट धाम डिवीजन का एक हिस्सा है। हमीरपुर उत्तर में जालौन, कानपुर और फतेहपुर जिलों, पूर्व में बांदा, दक्षिण में महोबा और पश्चिम में झांसी और जालौन जिलों से घिरा है। इसका क्षेत्रफल 4121 वर्ग किलोमीटर है। 2011 तक यह चित्रकूट और महोबा के बाद तीसरा सबसे कम आबादी वाला जिला था। यहां पर बेतवा नदी के तट पर मोटी रेत मिलती है। जो उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में निर्यात की जाती है। 

भूगोल

हमीरपुर जिले के अधिकांश भाग में अविकसित जंगल के कवर है। हमीरपुर जिले की उत्तरी सीमा यमुना नदी बनाती है। जिसकी जिले में लंबाई लगभग 56 किलोमीटर है। उत्तरी पश्चिमी सीमा बेतवा नदी बनाती है। यह नदी जालौन जिले से हमीरपुर जिले में बेरी नामक गांव के पास प्रवेश करती है। जिले में अन्य नदियां बरमा, केन, चंद्रावल और पंडवाहा है। बरमा नदी पर स्वामी ब्रह्मानंद बांध बनाया गया है। यहां की जलवायु अत्यधिक गर्म है। जिसका तापमान आमतौर पर मई जून महीने में 43 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है, तथा ठंड के महीने में यह कभी-कभी गिर कर 2 से 3 डिग्री सेंटीग्रेड तक आ जाता है। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल

हमीरपुर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से कल्पवृक्ष, मैहर टेंपल, चौरा देवी मंदिर, संगमेश्वर धाम मंदिर प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है। 

महोबा

 महोबा को चंदेलों की राजधानी भी कहा जाता है। जिन्होंने 10 वीं से 16 वीं शताब्दी तक बुंदेलखंड में शासन किया। चंदेल राजा विजय पाल ने विजय सागर का निर्माण करवाया। यह चंदेलों द्वारा महोबा में बनवाई गई सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। राजा परमर्दी के शासन के दौरान ही पृथ्वीराज चौहान ने महावर पर कब्जा किया था। जिसे 1182 में आल्हा, ऊदल नामक दो सेनापतियों के प्रतिरोध के बाद वापस कब्जा किया गया। महोबा पर शासन करने वाले चंदेलों के अलावा सम्राट शेरशाह सूरी और मुगल सम्राट अकबर थे। उसके बाद अंग्रेजों के बुंदेलखंड में कब्जा होने के बाद से यह ब्रिटिश साम्राज्य का भाग रहा। 

भूगोल 

महोबा उत्तर प्रदेश का 71 वां जिला है। यह राज्य की राजधानी लखनऊ से 238 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां की जनसंख्या के हिसाब से यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा जिला है। महोबा जिला उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की  सीमा में पड़ता है। जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से दक्षिणी भाग से घिरा हुआ है। उत्तर में हमीरपुर जिला पश्चिम में झांसी जिला इसकी सीमा बनाता है। इसका क्षेत्रफल 2884 वर्ग किलोमीटर है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 211 मीटर है। यह जिला हिंदी बेल्ट इंडिया के अंतर्गत आता है। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल 

महोबा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शिव तांडव मंदिर, राहिल सागर स्थित सूर्य मंदिर, ककरमठ मंदिर, चंडिका देवी मंदिर, गोखर पर्वत, जैन तीर्थंकर मंदिर आदि प्रमुख हैं। 

ललितपुर

ललितपुर जिला मुख्य रूप से पहले चंदेरी राज्य का हिस्सा था। इसकी स्थापना 17 वीं शताब्दी में ओरछा के राजा रुद्र प्रताप के वंशजों ने की थी। यह भी 18 वीं शताब्दी में बुंदेलखंड के अन्य हिस्सों के समान ही मराठा आधिपत्य में आ गया था। ग्वालियर के राजा दौलतराव सिंधिया ने 1811 में चंदेरी पर कब्जा कर लिया। 1844 में चंदेरी का राज्य अंग्रेजों ने हथिया लिया। जिसे ब्रिटिशों ने चंदेरी जिला बनाया। ललितपुर जिला 1891 से लेकर 1974 तक झांसी जिले का हिस्सा बना रहा। जिसे वर्ष 1974 में एक अलग जिले के रूप में स्थापित किया गया। 

भूगोल

यह जिला झांसी संभाग का हिस्सा है। जिसका भौगोलिक क्षेत्रफल 5039 वर्ग किलोमीटर है। यह जिला पूर्ण रूप से मध्यप्रदेश राज्य से घिरा हुआ है। इसके दक्षिण में सागर जिला पश्चिम में अशोक नगर और शिवपुरी जिले स्थित है। यह जिला बुंदेलखंड के पहाड़ी क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। इसके दक्षिण में विंध्य रेंज उत्तर में यमुना नदी की सहायक धसान नदी है। बेतवा नदी जिले की उत्तरी और पश्चिमी सीमा बनाती है। बेतवा की सहायक नदी जामनी नदी इस की पूर्वी सीमा बनाती है। जिले की जलवायु उपोष्ण कटिबंधीय है। जिससे यहां की गर्मियां बहुत गर्म और सर्दियाँ बहुत सर्द होती हैं। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल 

यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल  देवगढ़, राजघाट धाम, मुचकुंद गुफाएं, दशावतार मंदिर, मरदान सिंह किला, महावीर स्वामी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी आदि मुख्य हैं। 

मध्य प्रदेश के जिले

छतरपुर

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की स्थापना 1785 ईसवी में बुंदेलखंड स्वतंत्रता आंदोलन के संस्थापक नेता छत्रसाल के नाम पर की गई। 1785 में राजपूतों के पंवार वंश ने छतरपुर पर अपना अधिकार कर लिया। 1854 में छतरपुर व्यपगत सिद्धांत के अंतर्गत बारिस की कमी के चलते ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया। 1901 में छतरपुर शहर की आबादी 10029 थी। जो आजादी के बाद तेजी से बढ़ी। 

भूगोल

छतरपुर जिले का कुल क्षेत्रफल 8687 वर्ग किलोमीटर है। यह जिला उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में पन्ना, दक्षिण में दमोह, पश्चिम में सागर और टीकमगढ़ जिलों से घिरा हुआ है। यह सागर संभाग का हिस्सा है। इस की समुद्र तल से ऊंचाई 305 मीटर है। यह मध्य प्रदेश के उत्तर पूर्वी भाग का हिस्सा है। यह झांसी से 133 किलोमीटर और मध्यप्रदेश में ग्वालियर से 233 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। छतरपुर में  उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। यहां पर मानसून के मौसम में जून से सितंबर तक भारी वर्षा होती है। 

प्रमुख पर्यटन स्थल

छतरपुर जिले का ऐतिहासिक महत्व कुछ अलग ही है। यहां पर दर्शनीय स्थल चौसठ योगिनी मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, दुलादेव मंदिर, खजुराहो के प्रसिद्ध विष्णु मंदिर, केन घड़ियाल सेंचुरी, मातंगेश्वर मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, गुलगंज किला, महाराजा छत्रसाल म्यूजियम प्रसिद्ध हैं। 

टीकमगढ़

यह जिला पूर्व में ओरछा राज्य का भाग था। जिसकी स्थापना 1501 में रूद्र प्रताप ने की थी। जो ओरछा के पहले राजा बने। यहीं पर चतुर्भुज मंदिर का निर्माण ओरछा की रानी द्वारा करवाया गया। जो अकबर के समय यहां पर शासन करती थीं। 1848 से 1874 तक यहां हमीर सिंह ने शासन किया। 1901 में इस राज्य का क्षेत्रफल 2000 वर्ग मील था। यह 17 तोपों की सलामी वाला बुंदेल राज्यों में सबसे पुराना और सर्वोच्च रैंक वाला था। प्रताप सिंह के उत्तराधिकारी वीर सिंह ने 1 जनवरी 1950 को अपने राज्य का भारत में विलय कर दिया। यह जिला भिंड प्रदेश राज्य का हिस्सा बन गया। जिसे 1956 में मध्यप्रदेश राज्य को दे दिया गया। 

 भूगोल

यह जिला मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। यह जामनी नदी, धसान नदी और बेतवा नदी की एक सहायक नदी के बीच बुंदेलखंड के पठार पर स्थित है। टीकमगढ़ जिले का आकार बहुत ही अनियमित है जो उत्तरी सीमा के साथ त्रिकोणीय है। जिले की अधिकतम लंबाई उत्तर से दक्षिण तक 119 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग 80 किलोमीटर है। टीकमगढ़ जिला पूर्व में छतरपुर जिले, पश्चिम में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले, उत्तर में झांसी जिले और दक्षिण में सागर जिले से घिरा हुआ है। इस जिले की पूर्वी और पश्चिमी सीमाएं दो बड़ी नदियां बनाती हैं। 

प्रमुख पर्यटन स्थल

टीकमगढ़ के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से गढ़कुंडार किला, रानी महल, लक्ष्मी नारायण मंदिर, सुंदर महल, राय प्रवीण महल, जानकी मंदिर, दाऊजी की हवेली आदि प्रमुख हैं। 

दमोह

मध्यप्रदेश के जिले दमोह ने आजादी के संघर्ष में अंग्रेजों से टक्कर लेने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 1857 के विद्रोह में हिंडोरिया के ठाकुर किशोर सिंह, सिंगरामपुर के राजा देवी सिंह, करिजोग के पंचम सिंह, गंगाधर राव, रघुनाथ राव, मेजबान सिंह और गोविंद राव दमोह के इतिहास में प्रमुख रूप से उल्लिखित हैं। दमोह को 1896-97 और 1900 में भयानक अकाल का सामना करना पड़ा था। प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी सेठ गोविंद दास को 1923 में दमोह जेल में डाला गया था, और जेल में रहते हुए ही उन्होंने कई हिंदी नाटक लिखे। 1929 में आचार्य शांतिसागर ने दमोह का दौरा किया। 1946 में सागर विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में स्थापित किया गया। 1947 में ब्रिटिश राज्य ने भारत की स्वतंत्रता के साथ मध्य प्रांतों को मध्य प्रदेश राज्य के रूप में पुनर्गठित किया। 

 भूगोल

दमोह मध्य भारत में स्थित मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख जिला है। जो सागर डिवीजन का हिस्सा है। यह राज्य के उत्तरी पूर्वी भाग में स्थित है। इस जिले के पश्चिम में सागर, दक्षिण में नरसिंहपुर और जबलपुर, उत्तर में छतरपुर, पूर्व में कटनी जिले पड़ते हैं। यह एक पठारी क्षेत्र है। जिसमें सोन नदी दक्षिण पूर्व में बहती है। दमोह जिले का क्षेत्रफल 7306 वर्ग किलोमीटर है। इस शहर का नाम हिंदू पौराणिक कथाओं के राजा नल की पत्नी दमयंती के नाम पर पड़ा। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल 

दमोह जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल जटाशंकर, नोहता, पचमर्शी, राजनगर गांव, नरसिंहगढ़, जागेश्वर नाथ मंदिर, कुंडलपुर आदि मुख्य हैं। 

सागर

सागर जिला मध्य प्रदेश के प्राचीन भारतीय राज्य चेदि की राजधानी थी जिसे सूक्तमति कहा जाता था। जो बाद में सागर नाम से जाने गई। 1735 के बाद सागर में पेशवाओं का शासन आ गया। 1818 में पेशवा बाजीराव द्वितीय द्वारा सागर जिले का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया गया। सागर को बुंदेलखंड के राजनीतिक मामलों के अधीक्षक के रूप में रखा गया था। जिसे बाद में 1820 में इस क्षेत्र को गवर्नर जनरल के एजेंट के रूप में शामिल कर दिया गया। 1834 में यह क्षेत्र उत्तर पश्चिम प्रांत के अंतर्गत आ गया। उसके बाद 1861 में सागर और नागपुर राज्य ने संयुक्त प्रांत का गठन किया। जिसे सेंट्रल प्रोविंस कहा जाता है। 

भूगोल 

सागर की समुद्र तल से ऊंचाई 610 मीटर है। यह विंध्य रेंज के निचले हिस्से की तरफ आता है। सागर जिला मुख्य रूप से हथकरघा, कपास उद्योग, बीड़ी निर्माण उद्योग, रेलवे और इंजीनियरिंग कार्य के लिए प्रसिद्ध है। सागर उच्च शिक्षा का भी केंद्र है। यहां एक पुराना मराठा किला है, जो अब एक पुलिस प्रशिक्षण स्कूल है। यहां घुड़सवारी का भी एक स्कूल है। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल

 सागर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल गढ़पेहरा मंदिर, रंगिरो, खिमलासा, एरन, नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी, राहतगढ़ फॉल, सागर झील आदि हैं। 

दतिया

दतिया की स्थापना 1549 में राव भगवान राव के द्वारा की  गई थी। 1676 में उनकी मृत्यु के बाद यह जिला 1802 तक बेसिन की संधि के तहत बुंदेलखंड में अन्य राज्यों के साथ ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। यहां 1896-97 का भीषण अकाल पड़ा। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद दतिया के महाराजा ने भारत के आधिपत्य को स्वीकार कर लिया। जो बाद में भारत संघ में विलय हुआ। दतिया 1956 में मध्यप्रदेश राज्य में शामिल हो गया। 

 भूगोल

दतिया जिले का कुल क्षेत्रफल 2691 वर्ग किलोमीटर है। यह जिला उत्तर में मध्यप्रदेश के भिंड, पश्चिम में ग्वालियर और दक्षिण में शिवपुरी और पूर्व में उत्तर प्रदेश राज्य के झांसी जिले से घिरा हुआ है। यह ग्वालियर संभाग का हिस्सा है। यहां पर मुख्य रूप से हिंदी भाषा बोली जाती है, परंतु कहीं-कहीं पर बुंदेली का भी प्रचलन है। यहां पर लिखने के लिए द्रविडियन और देवनागरी लिपि का इस्तेमाल होता है। 

 प्रमुख पर्यटन स्थल 

दतिया जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से पीतांबरा पीठ, रतनगढ़, सोनागिरी, उनाव बालाजी, सूर्य मंदिर, जैन मंदिर, वीर सिंह महल आदि प्रमुख हैं। 

 पन्ना 

पन्ना मुख्य रूप से 13 वीं से 16 वीं शताब्दी तक एक गोंड बस्ती थी। जब चंदेलों ने गोंड को पराजित कर इस क्षेत्र में अपना अधिकार कर लिया, तब यह गोंड जनजाति मध्यप्रदेश के अन्य हिस्सों में चली गई। पन्ना बुंदेला राजपूत नेता छत्रसाल की राजधानी थी। जिन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। 1732 में उनकी मृत्यु के बाद उनके राज्य को उनके पुत्रों में विभाजित कर दिया गया। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में पन्ना ब्रिटिश राज्य की एक रियासत बन गया। आजादी के बाद 1 जनवरी 1950 को पन्ना के राजा महेंद्र यादवेंद्र सिंह भारत सरकार में शामिल हो गए और पन्ना विंध्य प्रदेश का एक जिला बन गया। जिसे बाद में 1956 में मध्यप्रदेश में मिला दिया गया। 

भूगोल 

पन्ना जिले का क्षेत्रफल 7135 वर्ग किलोमीटर है। पन्ना जिले से ही देश के सबसे अधिक हीरे निकाले जाते हैं। इसे हीरो का शहर भी कहा जाता है। इस जिले से केन नदी होकर बहती है। पांडव जलप्रपात और गाथा जलप्रपात इसी  जिले में स्थित है। पन्ना जिला मध्य प्रदेश के सबसे पिछड़े हुए क्षेत्रों में आता है। यह आय के मामले में राज्य के पांच सबसे ग़रीब जिलों में से एक है। 

प्रमुख पर्यटन स्थल

पन्ना जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से चौमुख नाथ मंदिर, राम जानकी मंदिर, बृहस्पति कुंड, अजय गढ़ किला, बलदेव जी मंदिर, जुगल किशोर जी मंदिर, प्राणनाथ जी मंदिर, पांडव गुफाएं आदि मुख्य है।

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